Sahityashastra aur Hindi Aalochana
by Dr. Jitendra Nath Mishra
₹400
| ISBN | 9789395430470 |
| Language | Hindi |
| Publication Year | 2026 |
| Edition | 1 |
| Pages | 456 |
| Binding | Paper Back |
| Publisher | VPMANDIR |
About this book
साहित्य क्या है? कविता कैसे जन्म लेती है? रस और आनंद की अनुभूति की वैज्ञानिक प्रक्रिया क्या है? प्रस्तुत पुस्तक इन सभी शाश्वत प्रश्नों का अत्यंत प्रामाणिक, तार्किक और सुबोध उत्तर प्रस्तुत करती है। यह ग्रंथ केवल सिद्धांतों का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय काव्यशास्त्र, पाश्चात्य साहित्यशास्त्र और आधुनिक हिंदी आलोचना की विकास-यात्रा का एक जीवंत आख्यान है। आचार्य भरतमुनि के 'रस-सूत्र' से लेकर प्लेटो और अरस्तू के 'अनुकरण' और 'विरेचन' तक; तथा कॉलरिज की 'कल्पना' से लेकर उत्तर-आधुनिकतावाद और देरिदा के 'विखंडनवाद' (Deconstruction) तक—यह पुस्तक संपूर्ण विश्व-समीक्षा-दर्शन को एक सूत्र में पिरोती है। साथ ही, यह कृति हिंदी आलोचना के शिखरों—आचार्य रामचंद्र शुक्ल के 'लोकमंगल', डॉ. नगेंद्र की 'मनोवैज्ञानिक रस-दृष्टि', प्रेमचंद के 'यथार्थवाद', डॉ. नामवर सिंह के 'नई कहानी विमर्श' और गजानन माधव मुक्तिबोध के 'आत्मसंघर्ष' एवं 'फैंटेसी'—का अत्यंत सूक्ष्म एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक आपके लिए क्यों अनिवार्य है? समग्रता: भारतीय और पाश्चात्य समीक्षा-सिद्धांतों का एक ही स्थान पर अद्भुत तुलनात्मक अध्ययन। सरलता: जटिल दार्शनिक और साहित्यिक सिद्धांतों (जैसे- रस, ध्वनि, संरचनावाद, मार्क्सवाद) की अत्यंत सुबोध और प्रवाहपूर्ण व्याख्या। उपयोगिता: साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों और गंभीर साहित्य-प्रेमियों के लिए एक बेजोड़ और प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ। साहित्य के मर्म, उसकी रचना-प्रक्रिया और आलोचना की विराट परंपरा को उसकी पूरी गहराई में समझने के लिए यह एक अत्यंत संग्रहणीय और पठनीय कृति है। इसे पढ़ें और साहित्य को देखने की एक नई दृष्टि प्राप्त करें!