SHIVRAJ VIJAYA (Pratham Nishwas)

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SHIVRAJ VIJAYA (Pratham Nishwas)

by Prof. (Dr.) Jai Singh

Sanskrit

₹125

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ISBN 9789395430111
Language Sanskrit
Publication Year 2023
Edition 1
Pages 128
Binding Paper Back
Publisher VPMANDIR

About this book

पुरातन परम्पराओं से कुछ हटकर लिखा गया यह गद्यकाव्य अपनी मौलिकता‚ ऐतिहासिकता और सुबोधता के कारण बहुत ही जनप्रिय ही नहीं हुआ अपितु विद्वान आलोचकों का भी प्रशंसा का विषय बन गया। इस अर्वाचीन कृति के महत्त्व को दृष्टिगत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति - २०२० में स्नातकीय परीक्षाओं में इसे स्थान दिया गया है। अस्तु‚ यत्किञ्चित्करी व्यवसायात्मिका बुद्धि से प्रेरित होकर इसके प्रथम विराम के प्रथम नि:श्वास की व्याख्या करने में प्रवृत्त हुआ। व्याख्या में कुछ तथ्य अवधेय हैं− सर्वप्रथम हिन्दी अनुवाद‚ तद्नन्तर संस्कृत-व्याख्या‚ हिन्दी-व्याख्या तथा टिप्पणी दी गई है। हिन्दी अनुवाद में शाब्दिक अनुवाद करने का प्रयास किया है किन्तु किसी विषय को भाषान्तरित करने में शाब्दिक अनुवाद असम्भव हो जाता है। इस कारण यत्किञ्चित् भाषात्मक अन्तर हो सकता है। संस्कृत-व्याख्या अत्यन्त सरल रूप में दी गई है क्योंकि उसका भी उद्देश्य विद्यार्थियों के लिये बोधगम्य बनाना था। हिन्दी-व्याख्या में विद्यार्थियों एवं पाठकों की सुविधा के लिये शब्दों का हिन्दी में अर्थ‚ समास‚ व्युत्पत्ति‚ व्याकरण (प्रकृति-प्रत्यय आदि) विशेष रूप से दिये गये हैं जिससे पाठकों या विद्यार्थियों को विश्लेषणात्मक ज्ञान हो सके। इसके बाद टिप्पणी में अलंकार‚ रस‚ गुण तथा अन्य अन्तर्निहित वैशिष्ट्यों का उल्लेख है। इस प्रकार मूल को अत्यन्त सरल एवं सुबोध बनाने का प्रयास किया गया है। प्रारम्भ की भूमिका में संस्कृत गद्यकाव्य का इतिहास‚ गद्य की विधाएँ‚ प्रमुख साहित्यकार− महाकवि बाणभट्ट‚ दण्डी‚ महाकवि सुबन्धु‚ शूद्रक‚ अम्बिकादत्त व्यास एवं पण्डिता क्षमाराव का परिचय तथा शिवराजविजय की काव्यगत विशेषताओं का उल्लेख किया है। जिससे परीक्षार्थियों को विशेष लाभ होगा।

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